धर्म के नाम पर राजनीति, पाखंड, अंधविश्वास, शोषण सब चलता है।


धर्म का धंधा, धर्म की आड़ में कैसे काले गुनाह चलते हैं, उन्हें कभी आमआदमी समझ नहीं पाता। धर्म के नाम पर हजारों लड़ाइयां हो चुकी हैं, जो आज भी चली हुई है। धर्म के नाम पर ही रोज दंगे होते हैं। धर्म के नाम पर रोज लोग मरते हैं। मौलवी, पुजारी, पादरी, संत, बाबा, धर्म का धंधा करते हुए अरबों पति बन जाते हैं।

धर्म के नाम पर राजनीति, पाखंड, अंधविश्वास, शोषण सब चलता है। जो देश जितना ज्यादा धार्मिक होगा, उस देश में साइंटिफिक सोच उतनी ही कम होगी और वह तरक्की में उतना ही पीछे होगा। किसी भी धर्म को ले लो सभी धर्मों के दुकानदार अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में लगे हैं।

धर्म की वजह से जातियां बनीं, धर्म की वजह से अलग-अलग संप्रदाय बने, धर्म की वजह से अलग-अलग देश बने, धर्म में अंधे हुए लोगों की वजह से मंदिरों और मस्जिदों में अरबो रुपए और टनों के  हिसाब से सोना इकट्ठा हो गया है, जबकि उस पैसे और सोने की जरूरत देश को, देश की गरीब जनता को है।

ज्योतिषी आपको दिन-रात लूट रहे हैं। धर्म के नाम पर हमारे समाज में बहुत सी कुरीतियां और पाखंड थे। कुछ खत्म कर दिए गए, लेकिन कुछ आज भी वैसे के वैसे ही हमारे समाज में फैले हुए हैं। सती प्रथा और देवदासी प्रथा जैसी कुरीतियां तो समाप्त कर दी गई है, पर Periods के समय महिलाओं का खाना न बनाना, मंदिरों में ना जाना, घर के बाहर सोना। जातिवाद, डायन, भूत-प्रेत जैसे अंधविश्वास आज भी समाज में वैसे ही हैं।

क्या आपका धर्म या आपका भगवान किसी भूखे को रोटी दे सकता है ? क्या किसी गरीब को मकान दे सकता है ? नहीं दे सकता, लेकिन आप लोग धर्म नाम की अफीम में अंधे होकर करोड़ों अरबों रुपए मंदिरों और मस्जिदों में दे देते हो, जिसकी जरूरत किसी गरीब को है।

बहुत से लोग जो पैसा मंदिरों में देते हैं उसका बहुत बड़ा भाग उन्होंने भी रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और बेईमानी से कमाया होता है। बड़े-बड़े मंदिरों में तो आप जिस काल्पनिक भगवान की मूर्ति के दर्शन करने जाते हैं, वहां पर भी  ज्यादा पैसा चढ़ाने वाले को जल्दी दर्शन करा दिए जाते हैं, जबकि गरीब को लाइन में खड़ा कर दिया जाता है। लेकिन धर्म के नाम पर आपको ऐसे मानसिक गुलाम बना दिया गया है कि आप इन बातों को कभी समझ ही नहीं सकते।

जिन देशों ने धर्म को एक तरफ रख कर साइंटिफिक सोच को अपना लिया, वह तरक्की में हमसे बहुत आगे जा चुके हैं। एक समय था जब वे देश भी अंधविश्वास और पाखंड में बहुत ही ज्यादा डूबे हुए थे। आप यूरोप और अमेरिका को ही ले लो। वहां पर 17 शताब्दी तक सिर्फ पादरियों और बाइबिल का ही बोलबाला था। पादरी लोगों को धर्म के नाम पर बुरी तरह से लूटते थे। लेकिन 16 शताब्दी में आए पुनर्जागरण काल ने यह सारी मान्यताएं तोड़ दी।

वैज्ञानिकों का आना और नई खोजों के बाद बाइबल को झूठा साबित कर दिया जाना। लेकिन उसके बाद भी कुछ समय तक वैज्ञानिकों को लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। कॉपरनिकस को जेल में बंद कर दिया गया, जबकि ब्रूनो को जिंदा जला दिया गया। गैलीलियो को भी कुछ समय के लिए कारावास में डाल दिया गया था। पादरियों ने डार्विन और उनकी थ्योरी के ऊपर भी प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका में तो कैथोलिक चर्च की वजह से अभी तक डार्विन थ्योरी स्कूल और कॉलेजों में नहीं पढ़ाई जाती थी, लेकिन आज यह सभी देश धार्मिक जहालत से बाहर आ चुके हैं। आज लगभग सारा यूरोप और अमेरिका पूरी तरह से विकसित है।

वैसे ही अगर इस्लामिक देशों की बात की जाए तो वहां पर तो सबसे ज्यादा कट्टरपन और धार्मिक जहालत भरी हुई है। लगभग सभी इस्लामिक देशों में अगर आप कुरान के खिलाफ एक शब्द भी बोलते हैं, तो आप को मृत्युदंड तक दिया जा सकता है। लगभग सभी मुस्लिम देशों में नास्तिक होना तो मौत को गले लगाने जैसा है। इसलिए ही सलमान रुश्दी, तसलीमा नसरीन और उनके जैसे दूसरे लेखकों को अपना देश तक छोड़ना पड़ा।

सीरिया, यमन, इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, लीबिया, मोरक्को, जैसे देश इस्लाम की वजह से तबाह हो चुके हैं, और लाखों लोग मारे जा चुके हैं और आज भी मारे जा रहे हैं। भारत में भी धर्म के ठेकेदार बने लोगों ने बहुत से लोगों को मारा है, जैसे कुलबरगी, दाभोलकर, गौरी लंकेश आदि।

अपने आप को धार्मिक कहने वाले लोग भ्रष्टाचार और बेईमानी भी करते हैं और उसी बेईमानी को छुपाने के लिए काल्पनिक भगवान के पास भी जाते हो। आप धर्म धर्म चिल्लाते हो और उसी धर्म के नाम पर अपने जैसे दूसरे इंसान को मार भी देते हो। जय जयकार करते हुए माता के मंदिर भी जाते हो और अपनी मां को वृद्ध आश्रम भी छोड़ आते हो। आप गाय माता, गाय माता दिन-रात चिल्लाते हो और उसी गाय को सड़कों में भूखा और प्यासा मरने के लिए छोड़ देते हो। आपकी आस्था ने देश की आबोहवा को जहरीला कर दिया है।

   – चेतन ठाकुर

तस्वीर प्रतीकात्मक GETTY से साभार।

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