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ज्वालादेवी की लौ क्यों जल रही है, कोई क्यों नहीं बताता ?

सोचता हूँ, कैसा वायरस बनाया है, मुख से उत्पन्न श्रेष्ठ-जनों ने ?

"कोई भी पैग़म्बर आख़िरी नहीं हो सकता है, दुनिया रोज़ बदलती है..."

बुद्ध के पहले अंधकार का युग था और बुद्ध के बाद प्रकाश का युग है।

जाति-उन्मूलन के बिना सत्य-अहिंसा के सिद्धांत की क्या प्रासंगिकता ?

धर्म के नाम पर राजनीति, पाखंड, अंधविश्वास, शोषण सब चलता है।

“ताबिश सिद्दिक़ी हिन्दू भी बन सकता है, मुसलमान भी, बुद्धिस्ट भी और..”